
Poetry by Suman
Welcome to my journey of exploring literature and the art of writing!
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- अंधियारी रातों मे काले घोर अंधेरे छाये। मैंने अपने जीवन में कितने सन्नाटे है पाये अंधियारी रातों में घोर अंधेरे छाये जीवन एक रेत का सागर हाथ बढाओ छूटा जाये अंधियारी रातो में काले घोर अंधेरे छाये मैंने अपने जीवन में कितने सन्नाटे है पाये पुण्य पाप है क्या इस,जग में सब कर्मों का लेखा । और अंधेरी इस दुनिया में कितने सन्नाटे है छाये। रातों में काले घोर अंधेरे छाये्। मैंने अपने जीवन में कितने सन्नाटे है पाये
- यादों का झरोखायाद आया फिर वो जमानाजब बेटी मायके आती थी तो सारे मोहल्ले में रोनक और धूम हो जाती थी।जब गेहूं साफ होते थे किट्टी पार्टी हो जाती थी।जब हर दिन लैटर बोक्स चैक किया जाता था।जब मुहल्ले की शादीयो में होटल के कमरे बुक नहीं होते थेपड़ोसीयैं के घर में बिस्तर लग जाते थे।जब शादीContinue reading “यादों का झरोखा”